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अच्छा-बुरा सब कुछ ख़यालो में रह गया,

अच्छा-बुरा सब कुछ ख़यालो में रह गया,
हैरान हूँ मैं कितने सवालों में रह गया,
चेहरे से हर बात बयाँ हो ,नहीं मुमकिन,
मंज़िल का निशाँ पैर के छालों में रह गया,
हर ज़ख्म की जहां में नुमाइश नहीं करते,
मयकश का दर्द उसके पियालों में रह गया,
सब कुछ मगर दिलों में मुहब्बत नहीं मिलती,
सच्चा इश्क़ फ़क़त मिसालों में रह गया,
दुनिया के ग़म सिमट के चले आते हैं क़रीब,
कहने को मैं ख़ुशी के उजालों में रह गया,

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